हनुमान साधना एवं रक्षा स्तोत्र

Shri Bajrang Baan Lyrics in Hindi + Meaning + PDF | श्री बजरंग बाण पाठ

श्री बजरंग बाण (Shri Bajrang Baan) परम शक्तिशाली संकटमोचक हनुमान जी का एक अत्यंत तीव्र और अमोघ पाठ है। मान्यता है कि जब जीवन में संकट, भय, शत्रु बाधा या तंत्र-नकारात्मक ऊर्जा का दबाव असहनीय हो जाए, तब बजरंग बाण का पाठ बाण की भांति तुरंत रक्षा करता है।

इस पाठ में हनुमान जी को उनके प्रभु श्री राम की सौगंध दिलाकर सहायता के लिए पुकारा जाता है, इसलिए इसका पाठ पूर्ण पवित्रता, सच्ची निष्ठा और विधि-विधान के साथ ही किया जाना चाहिए।

विशेष सावधानी: बजरंग बाण का पाठ किसी साधारण या छोटी बात के लिए बार-बार नहीं करना चाहिए। इसमें श्री राम की शपथ दी जाती है, अतः जब गंभीर संकट या भारी भय की स्थिति हो, तभी पूर्ण श्रद्धा व शुद्ध संकल्प के साथ इसका पाठ करें।

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श्री बजरंग बाण: मूल पाठ एवं सरल हिंदी व्याख्या

।। दोहा ।।
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥
भावार्थ: जो मनुष्य अटूट प्रेम, पूर्ण विश्वास और आदर-सत्कार के साथ हनुमान जी से प्रार्थना करता है, पवनपुत्र हनुमान उसके समस्त शुभ कार्यों को सिद्ध और सफल बना देते हैं।
।। चौपाई ।।
1
जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
सरल व्याख्या: हे संतों व भक्तों का कल्याण करने वाले हनुमान जी, आपकी जय हो। हे प्रभु! मेरी विनती सुन लीजिए। अपने सेवक का कार्य करने में तनिक भी देर न करें और शीघ्र दौड़कर हमें परम सुख व अभय प्रदान करें।
2
जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
आगे जाइ लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका॥
सरल व्याख्या: जिस प्रकार आपने एक छलांग में विशाल समुद्र पार किया, सुरसा के विशाल मुख में प्रवेश कर कुशलता से बाहर आए, और लंका के द्वार पर रोकने वाली लंकिनी को एक प्रहार से परास्त कर दिया, उसी पराक्रम से मेरे कष्टों का निवारण करें।
3
जाय बिभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥
बाग उजारि सिंधु महं बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा॥
सरल व्याख्या: आपने लंका पहुंचकर विभीषण को संबल व सुख दिया, माता सीता की खोज कर परम पद प्राप्त किया। आपने अशोक वाटिका को उजाड़कर राक्षसों के घमंड को चूर किया और यमराज के समान प्रहार करने वाले योद्धाओं को परास्त किया।
4
अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥
सरल व्याख्या: आपने अक्षय कुमार का वध किया और अपनी पूंछ में आग लपेटकर स्वर्णमयी लंका को लाख के समान जलाकर भस्म कर दिया। आपके इस अद्‍भुत पराक्रम को देखकर आकाश और देवलोक में आपकी जय-जयकार गूंज उठी।
5
अब बिलंब केहि कारन स्वामी। कृपा करहु उर अंतरयामी॥
जय जय लखन प्रान के दाता। आतुर ह्वै दुख हरहु निपाता॥
सरल व्याख्या: हे घट-घट की जानने वाले अंतर्यामी स्वामी! अब कृपा करने में किस कारण देरी हो रही है? हे लक्ष्मण जी के प्राणदाता महावीर, आप शीघ्र पधारकर मेरे समस्त दुखों का समूल नाश कीजिए।
6
जै गिरिधर जै बिपिन बिहारी। जय जय जय कपीस करुणा री॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥
सरल व्याख्या: द्रोणागिरि पर्वत उठाने वाले और वनों में विचरण करने वाले करुणासागर हनुमान जी की जय हो। हे चपल वेग से चलने वाले पवनपुत्र, इन दिव्य बीजाक्षरों के प्रभाव से आप शीघ्र मेरी रक्षा हेतु प्रकट हों।
7
ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥
अपने जन को तुरत उबारौ। सुमिरत होय आनंद हमारौ॥
सरल व्याख्या: आपकी एक हुंकार से दुष्टों और शत्रुओं की सेना भयभीत होकर भाग खड़ी होती है। हे प्रभु, अपने भक्त को संकट से तुरंत उबारिए, आपके स्मरण मात्र से हमारे भीतर असीम आनंद और निर्भयता का संचार होता है।
8
यहि बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहो फिर कौन उबारै॥
पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करैं प्रान की॥
सरल व्याख्या: जिस पर यह बजरंग बाण का प्रहार होता है, उसे संसार में फिर कोई नहीं बचा सकता। जो भी साधक नियमित रूप से बजरंग बाण का पाठ करता है, स्वयं हनुमान जी उसके प्राणों की हर क्षण रक्षा करते हैं।
9
भक्ति भाव भीनी अनुरागी। सोइ लहै जो है बड़भागी॥
उठि प्रातहि जो पाठ सुनावै। सो कबहूं नहिं संकट पावै॥
सरल व्याख्या: जो भक्त प्रेम और निष्ठा से युक्त होकर यह पाठ करता है, वह बड़ा भाग्यशाली है और हर फल प्राप्त करता है। जो व्यक्ति प्रातःकाल उठकर इसका पाठ करता है, वह जीवन में कभी किसी संकट में नहीं फंसता।
10
इन्हें मारु तहं सपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥
जनकसुता हरि दास कहावौ। ताकी सपथ बिलंब न लावौ॥
सरल व्याख्या: हे प्रभु! आपको मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की शपथ है, आप अपने और प्रभु के नाम की मर्यादा बनाए रखिए। आप माता सीता और प्रभु राम के अनन्य सेवक कहलाते हैं, अतः उनकी सौगंध मानकर कार्य में तनिक भी विलंब न कीजिए।
11
जय जय जय कपि रूप अनूपा। जय अनिरुद्ध सुकीरति रूपा॥
सत्य होहु हरि सपथ पाइके। राम दूत धरु मारु धाइके॥
सरल व्याख्या: हे अद्वितीय रूप वाले कपिराज, आपकी जय हो! हे निष्कलंक कीर्ति वाले वीर, प्रभु की शपथ लेकर मेरे सारे संकटों और शत्रुरूपी बाधाओं को दौड़कर नष्ट कर दीजिए।
12
जय हिमवान महा बलवंता। जय जय जय संजीवन संता॥
भक्त हेतु प्रभु दौरि पधारे। केसरी नंदन कष्ट निवारे॥
सरल व्याख्या: हिमालय जैसा विशाल पर्वत उठाने वाले महाबलशाली और संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जिलाने वाले हनुमान जी की जय हो। अपने भक्त के कष्ट निवारण हेतु हे केसरीनंदन, आप दौड़े चले आइए।
।। दोहा ।।
उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान।
बाधा सब बैरी करैं, सब काम सफल हनुमान॥
भावार्थ: हृदय में पूर्ण विश्वास और दृढ़ आस्था रखकर जो साधक हनुमान जी की शरण में रहकर यह पाठ करता है, उसकी सारी बाधाएं और शत्रु शांत हो जाते हैं तथा हनुमान जी उसके सारे मनोरथ सिद्ध करते हैं।
॥ ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ॥

श्री बजरंग बाण पाठ के प्रमुख लाभ

🛡️ घोर संकट और भय से रक्षा

जब किसी व्यक्ति को अज्ञात भय, रात में डर लगना या भारी मानसिक चिंता सताती हो, तब बजरंग बाण का पाठ कवच की तरह कार्य करता है।

⚡ शत्रु बाधा एवं नकारात्मक शक्तियों का नाश

घर या व्यापार स्थल पर नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नज़र या शत्रुओं के षड्यंत्र से सुरक्षा पाने में यह पाठ अचूक सिद्ध होता है।

🪐 गंभीर रोगों और शारीरिक व्याधियों में राहत

लंबे समय से चली आ रही असाध्य बीमारियों या पीड़ा के निवारण हेतु शुद्ध भाव से बजरंग बाण का पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।

🎯 रुके हुए कार्यों में तीव्र गति

यदि कोई अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य बार-बार अटक रहा हो, तो मंगलवार या शनिवार को संकल्प लेकर पाठ करने से अवरोध समाप्त होते हैं।

बजरंग बाण पाठ के जरूरी नियम एवं सावधानियां

  • शुद्ध संकल्प: पाठ का प्रयोग केवल अपनी आत्मरक्षा और संकट निवारण हेतु करें, किसी का अहित करने की भावना से कभी न करें।
  • आसन व वस्त्र: मंगलवार या शनिवार को लाल वस्त्र धारण कर, लाल कुशा या ऊनी आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर मुखी होकर पाठ करें।
  • दीपक व भोग: चमेली के तेल या शुद्ध घी का दीपक जलाएं, लाल पुष्प और बूंदी/गुड़-चने का भोग अर्पित करें।
  • ब्रह्मचर्य व शुद्धि: जितने दिन संकल्प लेकर पाठ करें, उतने दिन मन, वचन, कर्म से पूर्ण ब्रह्मचर्य और सात्विक आहार का पालन करें।

जय बजरंगबली

श्री बजरंग बाण हनुमान जी की कृपा पाने का एक साक्षात् शस्त्र है। जब भक्त सच्चे और पवित्र मन से पुकारता है, तो पवनपुत्र हनुमान बाण की गति से आकर अपने भक्त की रक्षा करते हैं।

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